भी निपुण थे। नरेन्द्र ने उनसे तरह-तरह के भोजन बनाने सीखें कालेज में वे अपने मित्रों को समय-समय पर अपने हाथ से भोजन बनाकर खिलाया करते थे। फिर जब वे स्वामी विवेकानन्द बनकर विश्व-भ्रमण पर गए तो विदेशियों को भारतीय खानों का स्वाद चखाया करते थे। अमेरिका में ‘सहÛद्वीप उद्यान’ में दो महीने के सहवास में वह अपने शिष्यों को प्रायः अपने हाथ से विभिन्न भारतीय व्यंजन तैयार करके खिलाते थे।
दो बरस के बाद जब नरेन्द्रनाथ रायपुर से लौटा
भी निपुण थे। नरेन्द्र ने उनसे तरह-तरह के भोजन बनाने सीखें कालेज में वे अपने मित्रों को समय-समय पर अपने हाथ से भोजन बनाकर खिलाया करते थे। फिर जब वे स्वामी विवेकानन्द बनकर विश्व-भ्रमण पर गए तो विदेशियों को भारतीय खानों का स्वाद चखाया करते थे। अमेरिका में ‘सहÛद्वीप उद्यान’ में दो महीने के सहवास में वह अपने शिष्यों को प्रायः अपने हाथ से विभिन्न भारतीय व्यंजन तैयार करके खिलाते थे।
दो बरस के बाद जब नरेन्द्रनाथ रायपुर से लौटा