किया करता। बाॅक्सिंग (मुुक्केबाजी) में वह एक बार सर्वप्रथम आया और उसे चांदी की तितली पुरस्कार में मिली। अपने समय में वह क्रिकेट का भी अच्छा खिलाड़ी था। उसे घोड़े की सवारी का शौक था। पिता ने उसके लिए एक अच्छा-सा घोड़ा खरीद दिया था, जिसपर सवार होकर वह हवाखोरी कि लिए जाया करता था। विश्वविख्यात लेखक रोमां रोला ने अपनी पुस्तक ‘विवेकानन्द’ में लिखा हैः
‘‘नरेन्द्र का शैशव और बाल्यकाल यूरोपीय पुनर्जागरण काल के कलाप्रेमी राजकुुमार
किया करता। बाॅक्सिंग (मुुक्केबाजी) में वह एक बार सर्वप्रथम आया और उसे चांदी की तितली पुरस्कार में मिली। अपने समय में वह क्रिकेट का भी अच्छा खिलाड़ी था। उसे घोड़े की सवारी का शौक था। पिता ने उसके लिए एक अच्छा-सा घोड़ा खरीद दिया था, जिसपर सवार होकर वह हवाखोरी कि लिए जाया करता था। विश्वविख्यात लेखक रोमां रोला ने अपनी पुस्तक ‘विवेकानन्द’ में लिखा हैः
‘‘नरेन्द्र का शैशव और बाल्यकाल यूरोपीय पुनर्जागरण काल के कलाप्रेमी राजकुुमार