योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

का-सा रहा। उनकी प्रतिभा बहुमुखी थी और सभी दिशाओं में उन्होंने उसका विकास किया। उनका रूप सिंह शावक का सा प्रभावशाली और मृग छौने-सा कोमल था। बलिष्ठ सुगठित शरीर कसरतों से और भी मंज गया था-कुश्ती, घोड़े की सवारी, तैरने और नाव खेने का उन्हें शौक था। युवकों के वे नेता और फैशन के नियंता थे। नृत्योंत्सवों में वे कलापूर्ण नृत्य करते थे और उनका कंठ बड़ा सुरीला था, जिसपर अनन्तर रामकृष्ण भी मुग्ध हुए। उन्होंने चार-पांच वर्ष तक हिंदू


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का-सा रहा। उनकी प्रतिभा बहुमुखी थी और सभी दिशाओं में उन्होंने उसका विकास किया। उनका रूप सिंह शावक का सा प्रभावशाली और मृग छौने-सा कोमल था। बलिष्ठ सुगठित शरीर कसरतों से और भी मंज गया था-कुश्ती, घोड़े की सवारी, तैरने और नाव खेने का उन्हें शौक था। युवकों के वे नेता और फैशन के नियंता थे। नृत्योंत्सवों में वे कलापूर्ण नृत्य करते थे और उनका कंठ बड़ा सुरीला था, जिसपर अनन्तर रामकृष्ण भी मुग्ध हुए। उन्होंने चार-पांच वर्ष तक हिंदू


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