है। कोई सामाजिक स्थिति शाश्वत नहीं और विचार के विकास की भी कोई निरपेक्ष सीमा नहीं।
यों माक्र्स ने हेगल के द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद को द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद बनाया अर्थात् उसे पैरों पर खड़ा किया और भविष्यवाणी की कि जिस प्रकार समान्तवाद से पूंजीवाद का जन्म हुआ है, पूंजीवाद से समाजवाद का जन्म होगा। माक्र्स की यह भविष्यवाणी सही सिद्व हुई। मानव व्यवहार ही किसी सिद्वान्त को परखने की एकमात्र कसौटी है।
विवेकानन्द की उपलब्धि
है। कोई सामाजिक स्थिति शाश्वत नहीं और विचार के विकास की भी कोई निरपेक्ष सीमा नहीं।
यों माक्र्स ने हेगल के द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद को द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद बनाया अर्थात् उसे पैरों पर खड़ा किया और भविष्यवाणी की कि जिस प्रकार समान्तवाद से पूंजीवाद का जन्म हुआ है, पूंजीवाद से समाजवाद का जन्म होगा। माक्र्स की यह भविष्यवाणी सही सिद्व हुई। मानव व्यवहार ही किसी सिद्वान्त को परखने की एकमात्र कसौटी है।
विवेकानन्द की उपलब्धि