योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

यह है कि उन्होंने वेदान्त दर्शन में क्रम विकास का सिद्वान्त जोड़ा। उनका भी यही मत है कि पहले विचार का विकास होता है और फिर उसके अनुसार समाज और उसकी विभिन्न संस्थाओं का विकास होता है। अमेरिका की ब्रकलिन नैतिक सभा में वे एक प्रश्न के उत्तर में कहते हैं:

‘‘मेरे मत में बाह्य जगत् की अवश्य एक सत्ता है-हमारे मन के विचार के बाहर भी उसका यह समग्र विश्व उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। चैतन्य का यह क्रम विकास जड़ के क्रम विकास


884 of 1197

यह है कि उन्होंने वेदान्त दर्शन में क्रम विकास का सिद्वान्त जोड़ा। उनका भी यही मत है कि पहले विचार का विकास होता है और फिर उसके अनुसार समाज और उसकी विभिन्न संस्थाओं का विकास होता है। अमेरिका की ब्रकलिन नैतिक सभा में वे एक प्रश्न के उत्तर में कहते हैं:

‘‘मेरे मत में बाह्य जगत् की अवश्य एक सत्ता है-हमारे मन के विचार के बाहर भी उसका यह समग्र विश्व उन्नति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। चैतन्य का यह क्रम विकास जड़ के क्रम विकास


884 of 1197