का एक बंगाली साप्ताहिक पत्र निकाला। इसमें उन्होंने 1821-24 में वैज्ञानिक विषयों पर जैसे ‘शून्य में गूंज’, चुम्बक के गुण’, मछलियों का आचरण’ और ‘बेलून की कहानी’ आदि कई लेख लिखे। इसके अलावा उन्होंने बंगला में व्याकरण, भूगोल, नक्षत्र विद्या और बीजगणित आदि पर पाठ्य-पुस्तक लिखीं और विराम, अर्धविराम इत्यादि अंगे्रज़ी आदि चिह्यों का प्रयोग करके बंगला भाषा को आधुनिक बनाया। इसके अलावा उन्होंने कई प्रकार के पैम्फ्लेट लिखे और यों-बंगला भाषा को सरल,
का एक बंगाली साप्ताहिक पत्र निकाला। इसमें उन्होंने 1821-24 में वैज्ञानिक विषयों पर जैसे ‘शून्य में गूंज’, चुम्बक के गुण’, मछलियों का आचरण’ और ‘बेलून की कहानी’ आदि कई लेख लिखे। इसके अलावा उन्होंने बंगला में व्याकरण, भूगोल, नक्षत्र विद्या और बीजगणित आदि पर पाठ्य-पुस्तक लिखीं और विराम, अर्धविराम इत्यादि अंगे्रज़ी आदि चिह्यों का प्रयोग करके बंगला भाषा को आधुनिक बनाया। इसके अलावा उन्होंने कई प्रकार के पैम्फ्लेट लिखे और यों-बंगला भाषा को सरल,