सुबेध और समृद्व बनाने में उनका बड़ा योगदान है।
अपने साप्ताहिक पत्र में उन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपील की कि वह एंग्लो-हिन्दू स्कूल जैसे स्कूल खोले, जिनमें बच्चों को शिक्षा मुफ्त दी जाए। जब
183 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कम्पनी सरकार ने पुराने ढंग की संस्कृत पाठशालाएं ही खोलने का निर्णय किया तो राजा राममोहन राय ने इसका कड़ा विरोध किया। इस पर भी कट्टरपंथी चिल्लाए कि राममोहन राय हमारी धार्मिक संस्थाओं को नष्ट कर देना चाहते हैं।
सुबेध और समृद्व बनाने में उनका बड़ा योगदान है।
अपने साप्ताहिक पत्र में उन्होंने ब्रिटिश सरकार से अपील की कि वह एंग्लो-हिन्दू स्कूल जैसे स्कूल खोले, जिनमें बच्चों को शिक्षा मुफ्त दी जाए। जब
183 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कम्पनी सरकार ने पुराने ढंग की संस्कृत पाठशालाएं ही खोलने का निर्णय किया तो राजा राममोहन राय ने इसका कड़ा विरोध किया। इस पर भी कट्टरपंथी चिल्लाए कि राममोहन राय हमारी धार्मिक संस्थाओं को नष्ट कर देना चाहते हैं।