उन्हें बुद्विजीवी तक नहीं मानते थे। और प्राचीन पद्वति को ज्यों का त्यों बनाए रखना चाहते थे। पर राजा राममोहन राय और उनके मुट्ठी-भर देशी-विदेशी समर्थकों ने इस विरोध का डटकर मुकाबला किया। नये और पुराने विचारों का संघर्ष तीव्र से तीव्र होता चला गया।
राजा राममोहन राय यह बात भली-भांति समझते थे कि सामाजिक अन्याय, कट्टरता और अंधविश्वास को दूर करने के लिए आधुनिक शिक्षा अत्यावश्यक है और वे उसे अधिक से अधिक फेलाना चाहते थे। लेकिन
उन्हें बुद्विजीवी तक नहीं मानते थे। और प्राचीन पद्वति को ज्यों का त्यों बनाए रखना चाहते थे। पर राजा राममोहन राय और उनके मुट्ठी-भर देशी-विदेशी समर्थकों ने इस विरोध का डटकर मुकाबला किया। नये और पुराने विचारों का संघर्ष तीव्र से तीव्र होता चला गया।
राजा राममोहन राय यह बात भली-भांति समझते थे कि सामाजिक अन्याय, कट्टरता और अंधविश्वास को दूर करने के लिए आधुनिक शिक्षा अत्यावश्यक है और वे उसे अधिक से अधिक फेलाना चाहते थे। लेकिन