यह बात समझ लेने की है कि समाज-सुधारकों और भारतीयों को आधुनिक शिक्षा देने में विदेशी सरकार को तनिक भी दिलचस्पी नहीं थी। पुराने ढंग की संस्कृत पाठशालाएं खोलने में उनका उद्देश्य केवल यह था कि हमारे देश की जनता भ्रम-भान्तियों और अंधविश्वास में पड़ी रहे। इसलिए उनका अभिप्राय जनता को शिक्षित बनाना नहीं, कट्टरपंथियों को संतुष्ट करना था। कट्टरपंथियों की तादाद कहीं ज़्यादा थी। उन्हांेने राममोहन राय के खिलाफ तूफान खड़ा कर दिया।
यह बात समझ लेने की है कि समाज-सुधारकों और भारतीयों को आधुनिक शिक्षा देने में विदेशी सरकार को तनिक भी दिलचस्पी नहीं थी। पुराने ढंग की संस्कृत पाठशालाएं खोलने में उनका उद्देश्य केवल यह था कि हमारे देश की जनता भ्रम-भान्तियों और अंधविश्वास में पड़ी रहे। इसलिए उनका अभिप्राय जनता को शिक्षित बनाना नहीं, कट्टरपंथियों को संतुष्ट करना था। कट्टरपंथियों की तादाद कहीं ज़्यादा थी। उन्हांेने राममोहन राय के खिलाफ तूफान खड़ा कर दिया।