मुगल बादशाह ने उन्हें अपना राजदूत बनाकर इंग्लैंड भेजा। वहां उन्हें ईस्ट इंडिया कम्पनी को नई सनद देने के संबंध में हाउस आफ कामन्स में होने वाली बहस में हिस्सा लेना था। वे 1831 के अपै्रल में इंग्लैंड पहुंचे। लिवरपूल, मैंचेस्टर, लंदन और राजदरबार में उनका सत्कार हुआ। वहां उन्होंने बैन्थम सरीखे प्रसिद्व व्यक्तियों से मित्रता का संबंध स्थापित किया। वहां से वे कुछ दिन के लिए फ्रांस गए और 27 सितम्बर, 1833 को मस्तिष्क ज्वर से ब्रिस्टल में उनका देहान्त
मुगल बादशाह ने उन्हें अपना राजदूत बनाकर इंग्लैंड भेजा। वहां उन्हें ईस्ट इंडिया कम्पनी को नई सनद देने के संबंध में हाउस आफ कामन्स में होने वाली बहस में हिस्सा लेना था। वे 1831 के अपै्रल में इंग्लैंड पहुंचे। लिवरपूल, मैंचेस्टर, लंदन और राजदरबार में उनका सत्कार हुआ। वहां उन्होंने बैन्थम सरीखे प्रसिद्व व्यक्तियों से मित्रता का संबंध स्थापित किया। वहां से वे कुछ दिन के लिए फ्रांस गए और 27 सितम्बर, 1833 को मस्तिष्क ज्वर से ब्रिस्टल में उनका देहान्त