योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

जाते समय उन्होंने इसलिए फ्रांसिसी जहाज़ से यात्रा की कि वे 1789 की फ्रांसिसी क्रांन्ति से बहुत अधिक प्रभावित थे और उसके ‘स्वाधीनता, समानता तथा बंधुत्व’ के आदर्शों को उन्होंने अपना आदर्श बना रखा था। उन्हें 1830 की फ्रांसिसी क्रांन्ति से भी पूरी सहानुभूति थी। नटाल बंदरगाह पर जब वे जोश में भरकर फ्रांसिसी तिरंगे झंडे को सलामी देने के लिए बेहताशा दौडे़ तो उनके टखने की हड्डी टूट गई।

संसार की राजनीतिक घटनाओं पर उनकी दृष्टि


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जाते समय उन्होंने इसलिए फ्रांसिसी जहाज़ से यात्रा की कि वे 1789 की फ्रांसिसी क्रांन्ति से बहुत अधिक प्रभावित थे और उसके ‘स्वाधीनता, समानता तथा बंधुत्व’ के आदर्शों को उन्होंने अपना आदर्श बना रखा था। उन्हें 1830 की फ्रांसिसी क्रांन्ति से भी पूरी सहानुभूति थी। नटाल बंदरगाह पर जब वे जोश में भरकर फ्रांसिसी तिरंगे झंडे को सलामी देने के लिए बेहताशा दौडे़ तो उनके टखने की हड्डी टूट गई।

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