योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

उन्हें कुछ ज़्यादा अधिकार नहीं मिल पाएंगे। इन परिस्थितियों में मैं नेपल्स के संघर्ष को और उसके शत्रुओं को अपना शत्रु समझता हूं। स्वाधीनता के शत्रु और निरकंुशता के मित्र न कभी सफल हुए हैं और न होंगे।’’

राममोहन राय ऐसे देशभक्त और ऐसे विश्व मानव थे कि उस युग के प्रसिद्व कवि मीर तकी ‘मीर’ ने शायद उन्हीं के बारे में लिखा था:

खंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम अमीर,

सारे जहां का दर्द हमारे ज़िगर में हैं।

राममोहन राय बहुमुखी


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उन्हें कुछ ज़्यादा अधिकार नहीं मिल पाएंगे। इन परिस्थितियों में मैं नेपल्स के संघर्ष को और उसके शत्रुओं को अपना शत्रु समझता हूं। स्वाधीनता के शत्रु और निरकंुशता के मित्र न कभी सफल हुए हैं और न होंगे।’’

राममोहन राय ऐसे देशभक्त और ऐसे विश्व मानव थे कि उस युग के प्रसिद्व कवि मीर तकी ‘मीर’ ने शायद उन्हीं के बारे में लिखा था:

खंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम अमीर,

सारे जहां का दर्द हमारे ज़िगर में हैं।

राममोहन राय बहुमुखी


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