प्रतिभा के समाज सुधारक थे। वे धर्म और राजनीति दोनों को लेकर चले। लेकिन उन्होंने असत्य और कुसंस्कार से कभी समझौता नहीं किया। जो कदम भी उठाया, दृढ़ता और निडरता से उठाया। उस समय जब समुद्र-यात्रा पाप समझी जाती थी, उनका विलायत जाना बड़े साहस का काम था। राममोहन राय विवेकानन्द के युयोग्य पूर्ववर्ती थे। उन्हें अगर आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाए तो इसमें तनिक भी अतिशयोक्ति नहीं। विवेकानन्द ने उनकी शिक्षाओं के तीन मूल सूत्रों का निर्देश किया है-वेदान्त ग्रहण,
प्रतिभा के समाज सुधारक थे। वे धर्म और राजनीति दोनों को लेकर चले। लेकिन उन्होंने असत्य और कुसंस्कार से कभी समझौता नहीं किया। जो कदम भी उठाया, दृढ़ता और निडरता से उठाया। उस समय जब समुद्र-यात्रा पाप समझी जाती थी, उनका विलायत जाना बड़े साहस का काम था। राममोहन राय विवेकानन्द के युयोग्य पूर्ववर्ती थे। उन्हें अगर आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाए तो इसमें तनिक भी अतिशयोक्ति नहीं। विवेकानन्द ने उनकी शिक्षाओं के तीन मूल सूत्रों का निर्देश किया है-वेदान्त ग्रहण,