कालेज के जो विद्यार्थी नास्तिक अथवा संदेहवादी बनते जा रहे थे, वे अब इस नये धर्म में आने लगे।
1850 में देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने अक्षयकुमार और राजनारायण के परामर्श से वेद की अपौरूषेयता तथा संभ्रान्ता के सिद्वान्त को ब्रह्यसमाज से निकाल दिया, जिससे वह हिन्दू धर्म हमेशा के लिए अलग हो गया। लेकिन आधुनिक शिक्षा प्राप्त नवयुवकों ने इस नये धर्म को अपनाया और वह बड़ी तेज़ी से पूरे बंगाल में फेल गया।
1858 में केशवचन्द्र सेन ब्रह्यसमाज
कालेज के जो विद्यार्थी नास्तिक अथवा संदेहवादी बनते जा रहे थे, वे अब इस नये धर्म में आने लगे।
1850 में देवेन्द्रनाथ ठाकुर ने अक्षयकुमार और राजनारायण के परामर्श से वेद की अपौरूषेयता तथा संभ्रान्ता के सिद्वान्त को ब्रह्यसमाज से निकाल दिया, जिससे वह हिन्दू धर्म हमेशा के लिए अलग हो गया। लेकिन आधुनिक शिक्षा प्राप्त नवयुवकों ने इस नये धर्म को अपनाया और वह बड़ी तेज़ी से पूरे बंगाल में फेल गया।
1858 में केशवचन्द्र सेन ब्रह्यसमाज