लहर के बाद दूसरी लहर देश को दबाती रही थी। तलवारें चमकी थी। एक लहर के बाद दूसरी लहर देश को दबाती रही थी। तलवारें चमकी थीं और ‘अल्ला-हो-अकबर’ नारों से भारत का आकाश गूंज उठा था। परन्तु धीरे-धीरे ये लहरें शान्त हो गई और राष्ट्रीय आदर्श पूर्ववत् बने रहे।’’ (सप्तम खंड, पृष्ठ 241)
यह ठीक है कि अर्थव्यवस्था किसी भी समाज का मुख्य आधार होती है। पर ऊपरी ढांचे-संस्कृति की उपेक्षा करना, चेतना और पदार्थ के द्वन्द्वात्मक संबंध की
लहर के बाद दूसरी लहर देश को दबाती रही थी। तलवारें चमकी थी। एक लहर के बाद दूसरी लहर देश को दबाती रही थी। तलवारें चमकी थीं और ‘अल्ला-हो-अकबर’ नारों से भारत का आकाश गूंज उठा था। परन्तु धीरे-धीरे ये लहरें शान्त हो गई और राष्ट्रीय आदर्श पूर्ववत् बने रहे।’’ (सप्तम खंड, पृष्ठ 241)
यह ठीक है कि अर्थव्यवस्था किसी भी समाज का मुख्य आधार होती है। पर ऊपरी ढांचे-संस्कृति की उपेक्षा करना, चेतना और पदार्थ के द्वन्द्वात्मक संबंध की