की महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। विवेकानन्द ने इतिहास को चूंकि अपनी दृष्टि से पढ़ा था, इसलिए वे लिखते हैं:
‘‘भारत में पूर्वोक्त सुधार की विचारधारा उस समय आई, जब ऐसा प्रतीत होता था कि मानो भौतिकवाद की तरंग जिसने भारत पर आक्रमण किया था, इस देश के प्राचीन आर्य ऋषियों की संस्कृति एवं शिक्षा को बहा देगी। परन्तु राष्ट्र पहले क्रान्ति की ऐसी हज़ारों तरंगों की चोट सह चुका था, पर यह तरंग अतीत की तरंगों की अपेक्षा हल्की ही थी। एक
की महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। विवेकानन्द ने इतिहास को चूंकि अपनी दृष्टि से पढ़ा था, इसलिए वे लिखते हैं:
‘‘भारत में पूर्वोक्त सुधार की विचारधारा उस समय आई, जब ऐसा प्रतीत होता था कि मानो भौतिकवाद की तरंग जिसने भारत पर आक्रमण किया था, इस देश के प्राचीन आर्य ऋषियों की संस्कृति एवं शिक्षा को बहा देगी। परन्तु राष्ट्र पहले क्रान्ति की ऐसी हज़ारों तरंगों की चोट सह चुका था, पर यह तरंग अतीत की तरंगों की अपेक्षा हल्की ही थी। एक