तैयार हूं। वहां से लौटकर घर भोजन करूंगा।
रमेश--कहता तो हूं, अभी आधा घंटे तक रूका हुआ हूं।
रमा ने एक मिनट में मुंह धोया, पांच मिनट में भोजन किया और चटपट रमेश के साथ दफ्तर चला।
रास्ते में रमेश ने मुस्कराकर कहा--घर क्या बहाना करोगे, कुछ सोच रक्खा
है?
रमानाथ--कह दूंगा, रमेश बाबू ने आने नहीं दिया।
रमेश--मुझे गालियां दिलाओगे और क्या फिर कभी न आने पाओगे।
रमानाथ--ऐसा स्त्री-भक्त नहीं हूं। हां, यह तो बताइए, मुझे अर्ज़ी लेकर तो साहब के पास न जाना पड़ेगा?
तैयार हूं। वहां से लौटकर घर भोजन करूंगा।
रमेश--कहता तो हूं, अभी आधा घंटे तक रूका हुआ हूं।
रमा ने एक मिनट में मुंह धोया, पांच मिनट में भोजन किया और चटपट रमेश के साथ दफ्तर चला।
रास्ते में रमेश ने मुस्कराकर कहा--घर क्या बहाना करोगे, कुछ सोच रक्खा
है?
रमानाथ--कह दूंगा, रमेश बाबू ने आने नहीं दिया।
रमेश--मुझे गालियां दिलाओगे और क्या फिर कभी न आने पाओगे।
रमानाथ--ऐसा स्त्री-भक्त नहीं हूं। हां, यह तो बताइए, मुझे अर्ज़ी लेकर तो साहब के पास न जाना पड़ेगा?