से लडाई के बगैर काम नहीं चलता।' रमा अप्रतिभ होकर ज़मीन की ओर ताकने लगा। वह कितनी मनहूस घड़ी थी, जब उसने रतन से रूपये लिए! बैठे-बिठाए विपत्ति मोल ली।
जालपा ने कहा, 'सच तो है, इन्हें क्यों नहीं सर्राफ की दुकान पर ले जाते,चीज़ आंखों से देखकर इन्हें संतोष हो जायगा।'
रतन-'मैं अब चीज़ लेना ही नहीं चाहती।'
रमा ने कांपते हुए कहा,'अच्छी बात है, आपको रूपये कल मिल जायंगे।'
रतन-'कल किस वक्त?'
रमानाथ-'दफ्तर से लौटते वक्त लेता आऊंगा।'
से लडाई के बगैर काम नहीं चलता।' रमा अप्रतिभ होकर ज़मीन की ओर ताकने लगा। वह कितनी मनहूस घड़ी थी, जब उसने रतन से रूपये लिए! बैठे-बिठाए विपत्ति मोल ली।
जालपा ने कहा, 'सच तो है, इन्हें क्यों नहीं सर्राफ की दुकान पर ले जाते,चीज़ आंखों से देखकर इन्हें संतोष हो जायगा।'
रतन-'मैं अब चीज़ लेना ही नहीं चाहती।'
रमा ने कांपते हुए कहा,'अच्छी बात है, आपको रूपये कल मिल जायंगे।'
रतन-'कल किस वक्त?'
रमानाथ-'दफ्तर से लौटते वक्त लेता आऊंगा।'