गबन - Gaban



रतन-'पूरे रूपये लूंगी। ऐसा न हो कि सौ-दो सौ रूपये देकर टाल दे।'

रमानाथ-'कल आप अपने सब रूपये ले जाइएगा।'

यह कहता हुआ रमा मरदाने कमरे में आया, और रमेश बाबू के नाम एक रूक्का लिखकर गोपी से बोला,इसे रमेश बाबू के पास ले जाओ। जवाब लिखाते आना। फिर उसने एक दूसरा रूक्का लिखकर विश्वम्भरदास को दिया कि माणिकदास को दिखाकर जवाब लाए। विश्वम्भर ने कहा,'पानी आ रहा है।'

रमानाथ-'तो क्या सारी दुनिया बह जाएगी! दौड़ते हुए जाओ।'

विश्वम्भर-'और वह जो घर पर न मिलें?'


349 of 1203



रतन-'पूरे रूपये लूंगी। ऐसा न हो कि सौ-दो सौ रूपये देकर टाल दे।'

रमानाथ-'कल आप अपने सब रूपये ले जाइएगा।'

यह कहता हुआ रमा मरदाने कमरे में आया, और रमेश बाबू के नाम एक रूक्का लिखकर गोपी से बोला,इसे रमेश बाबू के पास ले जाओ। जवाब लिखाते आना। फिर उसने एक दूसरा रूक्का लिखकर विश्वम्भरदास को दिया कि माणिकदास को दिखाकर जवाब लाए। विश्वम्भर ने कहा,'पानी आ रहा है।'

रमानाथ-'तो क्या सारी दुनिया बह जाएगी! दौड़ते हुए जाओ।'

विश्वम्भर-'और वह जो घर पर न मिलें?'


349 of 1203