गबन - Gaban



चपरासी-'सड़क के नुक्कड़ तक पहुंचे होंगे।'

रमानाथ-'यह आमदनी कैसे जमा होगी?'

चपरासी-'हुकुम हो तो बुला लाऊं?'

रमानाथ-'अजी, जाओ भी, अब तक तो कहा नहीं, अब उन्हें आधे रास्ते से बुलाने जाओगे। हो तुम भी निरे बछिया के ताऊब आज ज्यादा छान गए थे क्या? ख़ैर, रूपये इसी दराज़ में रखे रहेंगे। तुम्हारी ज़िम्मेदारी रहेगी।'

चपरासी-'नहीं बाबू साहब, मैं यहां रूपया नहीं रखने दूंगा। सब घड़ी बराबर नहीं जाती। कहीं रूपये उठ जायं, तो


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चपरासी-'सड़क के नुक्कड़ तक पहुंचे होंगे।'

रमानाथ-'यह आमदनी कैसे जमा होगी?'

चपरासी-'हुकुम हो तो बुला लाऊं?'

रमानाथ-'अजी, जाओ भी, अब तक तो कहा नहीं, अब उन्हें आधे रास्ते से बुलाने जाओगे। हो तुम भी निरे बछिया के ताऊब आज ज्यादा छान गए थे क्या? ख़ैर, रूपये इसी दराज़ में रखे रहेंगे। तुम्हारी ज़िम्मेदारी रहेगी।'

चपरासी-'नहीं बाबू साहब, मैं यहां रूपया नहीं रखने दूंगा। सब घड़ी बराबर नहीं जाती। कहीं रूपये उठ जायं, तो


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