गबन - Gaban

मैं बेगुनाह मारा जाऊं। सुभीते का ताला भी तो नहीं है यहां।'

रमानाथ-'तो फिर ये रूपये कहां रक्खूं?'

चपरासी-'हुजूर, अपने साथ लेते जाएं।'

रमा तो यह चाहता ही था। एक इक्का मंगवाया, उस पर रूपयों की थैली रक्खी और घर चला। सोचता जाता था कि अगर रतन भभकी में आ गई, तो क्या पूछना! कह दूंगा, दो-ही-चार दिन की कसर है। रूपये सामने देखकर उसे तसल्ली हो जाएगी।

जालपा ने थैली देखकर पूछा,क्या कंगन न मिला?'

रमानाथ-'अभी तैयार नहीं था,


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मैं बेगुनाह मारा जाऊं। सुभीते का ताला भी तो नहीं है यहां।'

रमानाथ-'तो फिर ये रूपये कहां रक्खूं?'

चपरासी-'हुजूर, अपने साथ लेते जाएं।'

रमा तो यह चाहता ही था। एक इक्का मंगवाया, उस पर रूपयों की थैली रक्खी और घर चला। सोचता जाता था कि अगर रतन भभकी में आ गई, तो क्या पूछना! कह दूंगा, दो-ही-चार दिन की कसर है। रूपये सामने देखकर उसे तसल्ली हो जाएगी।

जालपा ने थैली देखकर पूछा,क्या कंगन न मिला?'

रमानाथ-'अभी तैयार नहीं था,


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