गबन - Gaban



जालपा-'कल मुझसे दो सौ रूपये ले लेना, मेरे पास हैं।'

रमा को विश्वास न आया। बोला-'कहीं हों न तुम्हारे पास! इतने रूपये कहां से आए? '

जालपा-'तुम्हें इससे क्या मतलब, मैं तो दो सौ रूपये देने को कहती हूं।'

रमा का चेहरा खिल उठा। कुछ-कुछ आशा बंधी। दो-सौ रूपये यह देदे, दो सौ रूपये रतन से ले लूं, सौ रूपये मेरे पास हैं ही, तो कुल तीन सौ की कमी रह जाएगी, मगर यही तीन सौ रूपये कहां से आएंगे? ऐसा कोई नज़र न आता था, जिससे इतने रूपये मिलने की आशा की जा सके। हां,


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जालपा-'कल मुझसे दो सौ रूपये ले लेना, मेरे पास हैं।'

रमा को विश्वास न आया। बोला-'कहीं हों न तुम्हारे पास! इतने रूपये कहां से आए? '

जालपा-'तुम्हें इससे क्या मतलब, मैं तो दो सौ रूपये देने को कहती हूं।'

रमा का चेहरा खिल उठा। कुछ-कुछ आशा बंधी। दो-सौ रूपये यह देदे, दो सौ रूपये रतन से ले लूं, सौ रूपये मेरे पास हैं ही, तो कुल तीन सौ की कमी रह जाएगी, मगर यही तीन सौ रूपये कहां से आएंगे? ऐसा कोई नज़र न आता था, जिससे इतने रूपये मिलने की आशा की जा सके। हां,


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