गबन - Gaban

खूब याद आई, क्यों जल्ली, तेरी अम्मांजी के पास बडा अच्छा चन्द्रहार है। तुझे न देंगी।

जालपा ने एक लंबी सांस लेकर कहा--क्या कहूं बहन, मुझे तो आशा नहीं है।

शहजादी--एक बार कहकर देखो तो, अब उनके कौन पहनने-ओढ़ने के दिन बैठे हैं।

जालपा--मुझसे तो न कहा जायगा।

शहजादी--मैं कह दूंगी।

जालपा--नहीं-नहीं, तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं। मैं ज़रा उनके मातृस्नेह की परीक्षा लेना चाहती हूं।

बासन्ती ने शहजादी का हाथ पकड़कर कहा--अब उठेगी भी कि यहां सारी रात उपदेश ही देती रहेगी।


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खूब याद आई, क्यों जल्ली, तेरी अम्मांजी के पास बडा अच्छा चन्द्रहार है। तुझे न देंगी।

जालपा ने एक लंबी सांस लेकर कहा--क्या कहूं बहन, मुझे तो आशा नहीं है।

शहजादी--एक बार कहकर देखो तो, अब उनके कौन पहनने-ओढ़ने के दिन बैठे हैं।

जालपा--मुझसे तो न कहा जायगा।

शहजादी--मैं कह दूंगी।

जालपा--नहीं-नहीं, तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं। मैं ज़रा उनके मातृस्नेह की परीक्षा लेना चाहती हूं।

बासन्ती ने शहजादी का हाथ पकड़कर कहा--अब उठेगी भी कि यहां सारी रात उपदेश ही देती रहेगी।


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