गबन - Gaban



शहजादी उठी, पर जालपा रास्ता रोककर खड़ी हो गई और बोली--नहीं, अभी बैठो बहन, तुम्हारे पैरों पड़ती हूं।

शहजादी--जब यह दोनों चुड़ैलें बैठने भी दें। मैं तो तुम्हें गुर सिखाती हूं और यह दोनों मुझ पर झल्लाती हैं। सुन नहीं रही हो, मैं भी विष की गांठ हूं।

बासन्ती--विष की गांठ तो तू है ही।

शहजादी--तुम भी तो ससुराल से सालभर बाद आई हो, कौन-कौन-सी नई चीजें बनवा लाई।

बासन्ती--और तुमने तीन साल में क्या बनवा लिया।

शहजादी--मेरी बात छोड़ो,


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शहजादी उठी, पर जालपा रास्ता रोककर खड़ी हो गई और बोली--नहीं, अभी बैठो बहन, तुम्हारे पैरों पड़ती हूं।

शहजादी--जब यह दोनों चुड़ैलें बैठने भी दें। मैं तो तुम्हें गुर सिखाती हूं और यह दोनों मुझ पर झल्लाती हैं। सुन नहीं रही हो, मैं भी विष की गांठ हूं।

बासन्ती--विष की गांठ तो तू है ही।

शहजादी--तुम भी तो ससुराल से सालभर बाद आई हो, कौन-कौन-सी नई चीजें बनवा लाई।

बासन्ती--और तुमने तीन साल में क्या बनवा लिया।

शहजादी--मेरी बात छोड़ो,


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