सहसा पापनाशी की आंखंें खुल गईं। वह एक बलिष्ठ मांझी की गोद में था। मांझी बोला-'बस मित्र, शान्त हो जाओ। जल देवता साक्षी है कि तुम नींद में बुरी तरह चौंक पड़ते हो। अगर मैंने तुम्हें सम्हाल न लिया होता तो तुम अब तक पानी में डुबकियां खाते होते। आज मैंने तुम्हारी जान बचाई।'
पापनाशी बोला-'ईश्वर की दया है।'
वह तुरन्त उठ खड़ा हुआ और इस स्वप्न पर विचार करता हुआ आगे ब़ा। अवश्य ही यह दुस्वप्न है। नरक को मिथ्या समझना ईश्वरीय
सहसा पापनाशी की आंखंें खुल गईं। वह एक बलिष्ठ मांझी की गोद में था। मांझी बोला-'बस मित्र, शान्त हो जाओ। जल देवता साक्षी है कि तुम नींद में बुरी तरह चौंक पड़ते हो। अगर मैंने तुम्हें सम्हाल न लिया होता तो तुम अब तक पानी में डुबकियां खाते होते। आज मैंने तुम्हारी जान बचाई।'
पापनाशी बोला-'ईश्वर की दया है।'
वह तुरन्त उठ खड़ा हुआ और इस स्वप्न पर विचार करता हुआ आगे ब़ा। अवश्य ही यह दुस्वप्न है। नरक को मिथ्या समझना ईश्वरीय