कल शाम तक तुम्हें अनशन (वरत) रखना होगा।' जॉन ने समझा, वह ईश्वर का दूत है और दो दिन तक निर्जल रहा। पिशाच ने उन पर केवल यही एक विजय पराप्त की, यद्यपि इससे पिशाचराज का कोई कुत्सित उद्देश्य न पूरा हुआ, पर सन्त जॉन को अपनी पराजय का बहुत शोक हुआ। किन्तु पापनाशी ने जो स्वप्न देखा था उसका विषय ही कहे देता था कि इसका कर्ता पिशाच है।
वह ईश्वर से दीन शब्दों में कह रहा था-'मुझसे ऐसा कौनसा अपराध हुआ जिसके दण्डस्वरूप तूने मुझे पिशाच
कल शाम तक तुम्हें अनशन (वरत) रखना होगा।' जॉन ने समझा, वह ईश्वर का दूत है और दो दिन तक निर्जल रहा। पिशाच ने उन पर केवल यही एक विजय पराप्त की, यद्यपि इससे पिशाचराज का कोई कुत्सित उद्देश्य न पूरा हुआ, पर सन्त जॉन को अपनी पराजय का बहुत शोक हुआ। किन्तु पापनाशी ने जो स्वप्न देखा था उसका विषय ही कहे देता था कि इसका कर्ता पिशाच है।
वह ईश्वर से दीन शब्दों में कह रहा था-'मुझसे ऐसा कौनसा अपराध हुआ जिसके दण्डस्वरूप तूने मुझे पिशाच