के फन्दे में डाल दिया।' सहसा उसे मालूम हुआ कि मैं मनुष्यों के एक बड़े समूह में इधरउधर धक्के खा रहा हूं। कभी इधर जा पड़ता हूं, कभी उधर। उसे नगरों की भीड़भाड़ में चलने का अभ्यास न था। वह एक जड़ वस्तु की भांति इधर उधर ठोकरें खाता फिरता था, और अपने कमख्वाब के कुरते के दामन से उलझकर वह कई बार गिरतेगिरते बचा। अन्त में उसने एक मनुष्य से पूछा-'तुम लोग सबके-सब एक ही दिशा में इतनी हड़बड़ी के साथ कहां दौड़े जा रहे हो ? क्या किसी सन्त का उपदेश हो रहा है ?'
के फन्दे में डाल दिया।' सहसा उसे मालूम हुआ कि मैं मनुष्यों के एक बड़े समूह में इधरउधर धक्के खा रहा हूं। कभी इधर जा पड़ता हूं, कभी उधर। उसे नगरों की भीड़भाड़ में चलने का अभ्यास न था। वह एक जड़ वस्तु की भांति इधर उधर ठोकरें खाता फिरता था, और अपने कमख्वाब के कुरते के दामन से उलझकर वह कई बार गिरतेगिरते बचा। अन्त में उसने एक मनुष्य से पूछा-'तुम लोग सबके-सब एक ही दिशा में इतनी हड़बड़ी के साथ कहां दौड़े जा रहे हो ? क्या किसी सन्त का उपदेश हो रहा है ?'