पहली बार राक्षस ने मेरी कुटी में परवेश किया। उसने चित्तशान्ति के लिए छोटीसी परार्थना की और फिर थायस का ध्यान करने लगा।
उसने अपने मन में निश्चय किया ? 'हरीच्छा से मैं अवश्य उसका उद्घार करुंगा।' तब उसने विश्राम किया।
दूसरे दिन ऊषा के साथ उसकी निद्रा भी खुली। उसने तुरन्त ईशवंदना की और पालम सनत से मिलने गया जिनका आश्रम वहां से कुछ दूर था। उसने सन्त महात्मा को अपने स्वभाव के अनुसार परफुल्लचित्त से भूमि खोदते पाया। पालम
पहली बार राक्षस ने मेरी कुटी में परवेश किया। उसने चित्तशान्ति के लिए छोटीसी परार्थना की और फिर थायस का ध्यान करने लगा।
उसने अपने मन में निश्चय किया ? 'हरीच्छा से मैं अवश्य उसका उद्घार करुंगा।' तब उसने विश्राम किया।
दूसरे दिन ऊषा के साथ उसकी निद्रा भी खुली। उसने तुरन्त ईशवंदना की और पालम सनत से मिलने गया जिनका आश्रम वहां से कुछ दूर था। उसने सन्त महात्मा को अपने स्वभाव के अनुसार परफुल्लचित्त से भूमि खोदते पाया। पालम