अलंकार - Alankar

बहुत वृद्ध थे। उन्होंने एक छोटीसी फुलवाड़ी लगा रखी थी। वनजन्तु आकर उनके हाथों को चाटते थे और पिशाचादि कभी उन्हें कष्ट न देते थे।

उन्होंने पापनाशी को देखकर नमसकार किया।

पापनाशी ने उत्तर देते हुए कहा-'भगवान तुम्हें शान्ति दे।'

पालम-'तुम्हें भी भगवान शान्ति दे।' यह कहकर उन्होंने माथे का पसीना अपने कुरते की अस्तीन से पौंछा।

पापनाशी-बन्धुवर, जहां भगवान की चचार होती है वहां भगवान अवश्य वर्तमान रहते हैं। हमारा धर्म है


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बहुत वृद्ध थे। उन्होंने एक छोटीसी फुलवाड़ी लगा रखी थी। वनजन्तु आकर उनके हाथों को चाटते थे और पिशाचादि कभी उन्हें कष्ट न देते थे।

उन्होंने पापनाशी को देखकर नमसकार किया।

पापनाशी ने उत्तर देते हुए कहा-'भगवान तुम्हें शान्ति दे।'

पालम-'तुम्हें भी भगवान शान्ति दे।' यह कहकर उन्होंने माथे का पसीना अपने कुरते की अस्तीन से पौंछा।

पापनाशी-बन्धुवर, जहां भगवान की चचार होती है वहां भगवान अवश्य वर्तमान रहते हैं। हमारा धर्म है


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