अलंकार - Alankar

कोई वश नहीं। तुम देवियों की भांति रूपगुणशील और कोमल हृदय हो, और देवियों ही की भांति तुम्हें छोटेबड़े, भलेबुरे, सभी का मन रखना पड़ता है, सभी के आंसू पोंछने पड़ते हैं। हमारी तरह केवल सुन्दर सुकुमार ही की याचना स्वीकार करने से तुम्हारा यह लोकसम्मान कैसे होगा ?'

थायस ने कहा-'तुम दोनों जरा मुंह संभाल कर बातें करो। यह सिद्ध और चमत्कारी पुरुष है। कानों में कहीं कई बातें ही नहीं, मनोगत विचारों को भी जान लेता है। कहीं उसे क्रोध


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कोई वश नहीं। तुम देवियों की भांति रूपगुणशील और कोमल हृदय हो, और देवियों ही की भांति तुम्हें छोटेबड़े, भलेबुरे, सभी का मन रखना पड़ता है, सभी के आंसू पोंछने पड़ते हैं। हमारी तरह केवल सुन्दर सुकुमार ही की याचना स्वीकार करने से तुम्हारा यह लोकसम्मान कैसे होगा ?'

थायस ने कहा-'तुम दोनों जरा मुंह संभाल कर बातें करो। यह सिद्ध और चमत्कारी पुरुष है। कानों में कहीं कई बातें ही नहीं, मनोगत विचारों को भी जान लेता है। कहीं उसे क्रोध


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