अलंकार - Alankar

मुझे इसकी परवाह नहीं है कि संसार में सत्कर्म है या उठ गया। डोरियन, अपने आनन्द को अपने अधीन न रखना मूर्खों और मन्दबुद्धि वालों का काम है। मुझे ऐसी किसी वस्तु की इच्छा नहीं है जो विधाता की इच्छा के अनुकूल है। इस विधि से मैं अपने को उनसे अभिन्न बना लेता हूं और उनके निभरार्न्त सन्टोष में सहभागी हो जाता हूं। अगर सत्कर्मों का पतन हो रहा है तो हो, मैं परसन्न हूं, मुझे कोई आपत्ति नहीं। यह निरापत्ति मेरे चित्त आनन्द से भर देती है,


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मुझे इसकी परवाह नहीं है कि संसार में सत्कर्म है या उठ गया। डोरियन, अपने आनन्द को अपने अधीन न रखना मूर्खों और मन्दबुद्धि वालों का काम है। मुझे ऐसी किसी वस्तु की इच्छा नहीं है जो विधाता की इच्छा के अनुकूल है। इस विधि से मैं अपने को उनसे अभिन्न बना लेता हूं और उनके निभरार्न्त सन्टोष में सहभागी हो जाता हूं। अगर सत्कर्मों का पतन हो रहा है तो हो, मैं परसन्न हूं, मुझे कोई आपत्ति नहीं। यह निरापत्ति मेरे चित्त आनन्द से भर देती है,


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