क्योंकि यह मेरे तर्क या साहस की परमोज्ज्वल कीर्ति है। परत्येक विषय में मेरी बुद्धि देवबुद्धि का अनुसरण करती है, और नकल असल से कहीं मूल्यवान होती है। वह अविश्रान्त सच्चिन्ता और सदुद्योग का फल होती है।'
निसियास-'आपका आशय समझ गया। आप अपने को ईश्वर इच्छा के अनुरूप बनाते हैं। लेकिन अगर उद्योग ही से सब कुछ हो सकता है, अगर लगन ही मनुष्य को ईश्वरतुल्य बना सकती, और साधनों से ही आत्मा परमात्मा में विलीन होती है, तो उस मेंक ने,
क्योंकि यह मेरे तर्क या साहस की परमोज्ज्वल कीर्ति है। परत्येक विषय में मेरी बुद्धि देवबुद्धि का अनुसरण करती है, और नकल असल से कहीं मूल्यवान होती है। वह अविश्रान्त सच्चिन्ता और सदुद्योग का फल होती है।'
निसियास-'आपका आशय समझ गया। आप अपने को ईश्वर इच्छा के अनुरूप बनाते हैं। लेकिन अगर उद्योग ही से सब कुछ हो सकता है, अगर लगन ही मनुष्य को ईश्वरतुल्य बना सकती, और साधनों से ही आत्मा परमात्मा में विलीन होती है, तो उस मेंक ने,