जो मरुस्थल में एकान्तनिवासी और तपस्या करते हैं, आज संयोग से हमारे मेहमान हो गये हैं।'
कोटा-'मित्र जेनाथेमीज, इतना और ब़ा दो कि उन्होंने बिना निमन्त्रित हुए यह कृपा की है, इसलिए उन्हीं को सम्मानपद की शोभा ब़ानी चाहिए।
जेनाथेमीज-इसलिए मित्रवरो, हमारा कर्तव्य है कि उनके सम्मानार्थ वही बातें करें जो उनको रुचिकर हों। यह तो स्पष्ट है कि ऐसा त्यागी पुरुष मसालों की गन्ध को इतना रुचिकर नहीं समझता जितना पवित्र विचारों की सुगन्ध
जो मरुस्थल में एकान्तनिवासी और तपस्या करते हैं, आज संयोग से हमारे मेहमान हो गये हैं।'
कोटा-'मित्र जेनाथेमीज, इतना और ब़ा दो कि उन्होंने बिना निमन्त्रित हुए यह कृपा की है, इसलिए उन्हीं को सम्मानपद की शोभा ब़ानी चाहिए।
जेनाथेमीज-इसलिए मित्रवरो, हमारा कर्तव्य है कि उनके सम्मानार्थ वही बातें करें जो उनको रुचिकर हों। यह तो स्पष्ट है कि ऐसा त्यागी पुरुष मसालों की गन्ध को इतना रुचिकर नहीं समझता जितना पवित्र विचारों की सुगन्ध