को। इसमें कोइे सन्देह नहीं है कि जितना आनन्द उन्हें ईसाई धर्मसिद्घान्तों के विवेचन से पराप्त होगा, जिनके वह अनुयायी हैं, उतना और विषय से नहीं हो सकता। मैं स्वयं इस विवेचन का पक्षपाती हूं, क्योंकि इसमें कितने ही सवारंगसुन्दर और विचित्र रूपकों का समावेश है जो मुझे अत्यन्त पिरय हैं। अगर शब्दों से आशय का अनुमान किया जा सकता है, तो ईसाई सिद्घान्तों में सत्य की मात्रा परचुर है और ईसाई धर्मगरन्थ ईश्वरज्ञान से परिपूर्ण है। लेकिन सन्त पापनाशी,
को। इसमें कोइे सन्देह नहीं है कि जितना आनन्द उन्हें ईसाई धर्मसिद्घान्तों के विवेचन से पराप्त होगा, जिनके वह अनुयायी हैं, उतना और विषय से नहीं हो सकता। मैं स्वयं इस विवेचन का पक्षपाती हूं, क्योंकि इसमें कितने ही सवारंगसुन्दर और विचित्र रूपकों का समावेश है जो मुझे अत्यन्त पिरय हैं। अगर शब्दों से आशय का अनुमान किया जा सकता है, तो ईसाई सिद्घान्तों में सत्य की मात्रा परचुर है और ईसाई धर्मगरन्थ ईश्वरज्ञान से परिपूर्ण है। लेकिन सन्त पापनाशी,