जिससे ईश्वर ज्ञान पराप्त हो जाता था। लेकिन आदम के परेमसूत्र में बंधे होने के कारण उसे यह कब स्वीकार हो सकता था कि उसका पति का हाथ पकड़ा और ज्ञानवृक्ष के पास आयी। तब उसने एक तपता हुआ फल उठाया, उसे थोड़ासा काटकर खाया और शेष अपने चिरसंगी को दे दिया। मुसीबत यह हुई कि आइवे उसी समय बगीचे में टहल रहा था। ज्योंही हौवा ने फल उठाया, वह अचानक उनके सिर पर आ पहुंचा और जब उसे ज्ञात हुआ कि इन पराणियों को ज्ञानचक्षु खुल गये हैं तो उसके
जिससे ईश्वर ज्ञान पराप्त हो जाता था। लेकिन आदम के परेमसूत्र में बंधे होने के कारण उसे यह कब स्वीकार हो सकता था कि उसका पति का हाथ पकड़ा और ज्ञानवृक्ष के पास आयी। तब उसने एक तपता हुआ फल उठाया, उसे थोड़ासा काटकर खाया और शेष अपने चिरसंगी को दे दिया। मुसीबत यह हुई कि आइवे उसी समय बगीचे में टहल रहा था। ज्योंही हौवा ने फल उठाया, वह अचानक उनके सिर पर आ पहुंचा और जब उसे ज्ञात हुआ कि इन पराणियों को ज्ञानचक्षु खुल गये हैं तो उसके