किन्तु पराविद्या आत्मोल्लास द्वारा ही पराप्त हो सकती है। प्लेटो पीथागोरस अरस्तू आदि महात्माओं में अपार बुद्धिशक्ति थी, पर वह ईश्वर की उस अनन्य भक्ति से वंचित थे। जिसमें ईसू सराबोर थे। उनमें वह तन्मयता न थी। जो परभु मसीह में थी।'
हरमोडोरस-'जेनाथेमीज, तुम्हारा यह कथन सर्वथा सत्य है कि जैसे दूब ओस पीकर जीती और फैलती है, उसी परकार जीवात्मा का पोषण परंम आनन्द द्वारा होता है। लेकिन हम इसके आगे भी जा सकते हैं और कह सकते हैं
किन्तु पराविद्या आत्मोल्लास द्वारा ही पराप्त हो सकती है। प्लेटो पीथागोरस अरस्तू आदि महात्माओं में अपार बुद्धिशक्ति थी, पर वह ईश्वर की उस अनन्य भक्ति से वंचित थे। जिसमें ईसू सराबोर थे। उनमें वह तन्मयता न थी। जो परभु मसीह में थी।'
हरमोडोरस-'जेनाथेमीज, तुम्हारा यह कथन सर्वथा सत्य है कि जैसे दूब ओस पीकर जीती और फैलती है, उसी परकार जीवात्मा का पोषण परंम आनन्द द्वारा होता है। लेकिन हम इसके आगे भी जा सकते हैं और कह सकते हैं