और मृत्यु में कोई अन्तर नहीं। और उस अवस्था में उसे स्वगीर्य पावित्र्य में मग्न होकर परम आनन्द और संपूर्ण ज्ञान पराप्त हो जाता है। वह उसमें ऐक्य परविष्ट हो जाती है जो सर्वव्यापी है। उसे परमपद या सिद्धि पराप्त हो जाती है।'
निसियास-'बड़ी ही सुन्दर युक्ति है, लेकिन हरमोडोरस, सच्ची बात तो यह है कि मुझे 'अस्ति' और 'नास्ति' में कोई भिन्नता नहीं दीखती। शब्दों में इस भिन्नता को व्यक्त करने की सामथ्र्य नहीं है। 'अनन्त' और 'शून्य'
और मृत्यु में कोई अन्तर नहीं। और उस अवस्था में उसे स्वगीर्य पावित्र्य में मग्न होकर परम आनन्द और संपूर्ण ज्ञान पराप्त हो जाता है। वह उसमें ऐक्य परविष्ट हो जाती है जो सर्वव्यापी है। उसे परमपद या सिद्धि पराप्त हो जाती है।'
निसियास-'बड़ी ही सुन्दर युक्ति है, लेकिन हरमोडोरस, सच्ची बात तो यह है कि मुझे 'अस्ति' और 'नास्ति' में कोई भिन्नता नहीं दीखती। शब्दों में इस भिन्नता को व्यक्त करने की सामथ्र्य नहीं है। 'अनन्त' और 'शून्य'