न दर्शन का, न विज्ञान का। देवताओं की मनोहर परतिमाएं देवालयों में तहसनहस कर दी जायेंगी। मानवहृदय में भी उनकी स्मृति न रहेगी। बुद्धि पर अन्धकार छा जायेगा और यह भूमण्डल उसी अन्धकार में विलीन हो जायेगा। क्या हमें यह आशा हो सकती है कि म्लेच्छ जातियां संसार में सुबुद्धि और सुनीति का परसार करेंगी ? क्या जर्मन जाति संगीत और विज्ञान की उपासना करेगी ? क्या अरब के पशु अमर देवताओं का सम्मान करेंगे ? कदापि नहीं। हम विनाश की ओर भयंकर
न दर्शन का, न विज्ञान का। देवताओं की मनोहर परतिमाएं देवालयों में तहसनहस कर दी जायेंगी। मानवहृदय में भी उनकी स्मृति न रहेगी। बुद्धि पर अन्धकार छा जायेगा और यह भूमण्डल उसी अन्धकार में विलीन हो जायेगा। क्या हमें यह आशा हो सकती है कि म्लेच्छ जातियां संसार में सुबुद्धि और सुनीति का परसार करेंगी ? क्या जर्मन जाति संगीत और विज्ञान की उपासना करेगी ? क्या अरब के पशु अमर देवताओं का सम्मान करेंगे ? कदापि नहीं। हम विनाश की ओर भयंकर