और उन्होंने अभी पापनाशी महोदय से यहूदी गरन्थों के विषय में कुछ जिज्ञासा की थी। लेकिन उक्त महोदय ने कोई उत्तर नहीं दिया और हमें इसका कोई आश्चर्य न होना चाहिए क्योंकि उन्होंने मौन वरत धारण किया है। लेकिन आपने ईसाई धर्मसभाओं में व्याख्यान दिये हैं। बादशाह कांन्सटैनटाइन की सभा को भी आपने अपनी अमृतवाणी से कृतार्थ किया है। आप चाहें तो ईसाई धर्म का तात्त्विक विवेचन और उन गुप्त आशयों का स्पष्टीकरण करके, जो ईसाई दन्तकथाओं में निहित हैं,
और उन्होंने अभी पापनाशी महोदय से यहूदी गरन्थों के विषय में कुछ जिज्ञासा की थी। लेकिन उक्त महोदय ने कोई उत्तर नहीं दिया और हमें इसका कोई आश्चर्य न होना चाहिए क्योंकि उन्होंने मौन वरत धारण किया है। लेकिन आपने ईसाई धर्मसभाओं में व्याख्यान दिये हैं। बादशाह कांन्सटैनटाइन की सभा को भी आपने अपनी अमृतवाणी से कृतार्थ किया है। आप चाहें तो ईसाई धर्म का तात्त्विक विवेचन और उन गुप्त आशयों का स्पष्टीकरण करके, जो ईसाई दन्तकथाओं में निहित हैं,