हमें सन्तुष्ट कर सकते हैं। क्या ईसाइयों का मुख सिद्घान्त तौहीन (अद्वैतवाद) नहीं है, जिस पर मेरा विश्वास होगा ?'
मार्कस-'हां, सुविज्ञ मित्रो, मैं अद्वैतवादी हूं ! मैं उस ईश्वर को मानता हूं जो न जन्म लेता है, न मरता है, जो अनन्त है, अनादि है, सृष्टि का कर्ता है।'
निसियास-'महाशय मार्कस, आप एक ईश्वर को मानते हैं, यह सुनकर हर्ष हुआ। उसी ने सृष्टि की रचना की, यह विकट समस्या है। यह उसके जीवन में बड़ा त्र्कान्तिकारी समय होगा।
हमें सन्तुष्ट कर सकते हैं। क्या ईसाइयों का मुख सिद्घान्त तौहीन (अद्वैतवाद) नहीं है, जिस पर मेरा विश्वास होगा ?'
मार्कस-'हां, सुविज्ञ मित्रो, मैं अद्वैतवादी हूं ! मैं उस ईश्वर को मानता हूं जो न जन्म लेता है, न मरता है, जो अनन्त है, अनादि है, सृष्टि का कर्ता है।'
निसियास-'महाशय मार्कस, आप एक ईश्वर को मानते हैं, यह सुनकर हर्ष हुआ। उसी ने सृष्टि की रचना की, यह विकट समस्या है। यह उसके जीवन में बड़ा त्र्कान्तिकारी समय होगा।