राजा या अपंग हो तो व्यर्थ रोरोकर दिन मत काटो, वरन तुम्हें जो काम सौंपा गया है, उसे यथासाध्य उत्तम रीति से पूरा करो।'
निसियास-'तब कोई झंझट ही नहीं रहा। लंगड़े को चाहिए कि लंगड़ाये, पागल को चाहिए कि खूब द्वन्द्ध मचाये; जितना उत्पात कर सके, करे। कुलटा को चाहिए जितने घर घालते बने घाले; जितने घाटों का पानी पी सके, पिये; जितने हृदयों का सर्वनाश कर सके, करे। देशद्रोही को चाहिए कि देश में आग लगा दे, अपने भाइयों का गला कटवा दे,
राजा या अपंग हो तो व्यर्थ रोरोकर दिन मत काटो, वरन तुम्हें जो काम सौंपा गया है, उसे यथासाध्य उत्तम रीति से पूरा करो।'
निसियास-'तब कोई झंझट ही नहीं रहा। लंगड़े को चाहिए कि लंगड़ाये, पागल को चाहिए कि खूब द्वन्द्ध मचाये; जितना उत्पात कर सके, करे। कुलटा को चाहिए जितने घर घालते बने घाले; जितने घाटों का पानी पी सके, पिये; जितने हृदयों का सर्वनाश कर सके, करे। देशद्रोही को चाहिए कि देश में आग लगा दे, अपने भाइयों का गला कटवा दे,