झूठे को झूठ का ओ़नाबिछौना बनवाना चाहिए, हत्यारे को चाहिए कि रक्त को नदी बहा दे, और अभिनय समाप्त हो जाने पर सभी खिलाड़ी, राजा हो या रंग, न्यायी हो या अन्यायी, खूनी जालिम, सती, कामनियां; कुलकलंकिनी स्त्रियां, सज्जन, दुर्जन, चोर, साहू सबके-सब उन कवि महोदय के परशंसापात्र बन जायें, सभी समान रूप से सराहे जायें। क्या कहना !'
यूत्र्काइटीज-'निसियास, तुमने मेरे विचार को बिल्कुल विकृत कर दिया, एक तरुण युवती सुन्दरी को भयंकर पिशाचिनी बना दिया। यदि तुम देवताओं की परकृति,
झूठे को झूठ का ओ़नाबिछौना बनवाना चाहिए, हत्यारे को चाहिए कि रक्त को नदी बहा दे, और अभिनय समाप्त हो जाने पर सभी खिलाड़ी, राजा हो या रंग, न्यायी हो या अन्यायी, खूनी जालिम, सती, कामनियां; कुलकलंकिनी स्त्रियां, सज्जन, दुर्जन, चोर, साहू सबके-सब उन कवि महोदय के परशंसापात्र बन जायें, सभी समान रूप से सराहे जायें। क्या कहना !'
यूत्र्काइटीज-'निसियास, तुमने मेरे विचार को बिल्कुल विकृत कर दिया, एक तरुण युवती सुन्दरी को भयंकर पिशाचिनी बना दिया। यदि तुम देवताओं की परकृति,