सभी परकार की अमानुषीय यातनाएं सही; और अपने सौन्दर्य द्वारा राष्ट्रों का संहारा कर दिया, जिसमें ईश्वर भूमण्डल के कुकर्मों को क्षमा कर दे। और वह ईश्वरीय विचारशक्ति, वह योनिया, कभी इतनी स्वगीर्य शोभा को पराप्त न हुई थी, अब वह नारी रूप धारण करके योद्घाओं और ग्वालों को यथावसर अपनी शय्या पर स्थान देती थी। कविजनों ने उससे दैवी महत्व का अनुभव करके ही उसके चरित्र का इतना शान्त, इतना सुन्दर, इतना घातक चित्रण किया है और इन शब्दों
सभी परकार की अमानुषीय यातनाएं सही; और अपने सौन्दर्य द्वारा राष्ट्रों का संहारा कर दिया, जिसमें ईश्वर भूमण्डल के कुकर्मों को क्षमा कर दे। और वह ईश्वरीय विचारशक्ति, वह योनिया, कभी इतनी स्वगीर्य शोभा को पराप्त न हुई थी, अब वह नारी रूप धारण करके योद्घाओं और ग्वालों को यथावसर अपनी शय्या पर स्थान देती थी। कविजनों ने उससे दैवी महत्व का अनुभव करके ही उसके चरित्र का इतना शान्त, इतना सुन्दर, इतना घातक चित्रण किया है और इन शब्दों