में उसका सम्बोधन किया है-तेरी आत्मा निश्चल सागर की भांति शान्त है !
'इस परकार पश्चात्ताप और दया ने योनिया से नीचसे-नीच कर्म कराये और दारुण दुःख झेलवाया। अन्त में उसकी मृत्यु हो गयी और उसकी जन्मभूमि में अभी तक उसकी कबर मौजूद है। उसका मरना आवश्यक था, जिसमें वह भोगविलास के पश्चात मृत्यु की पीड़ा का अनुभव करे और लगाये हुए वृक्ष के कडुए फल चखे। लेकिन हेलेन के शरीर को त्याग करने के बाद उसने फिर स्त्री का जन्म लिया और फिर
में उसका सम्बोधन किया है-तेरी आत्मा निश्चल सागर की भांति शान्त है !
'इस परकार पश्चात्ताप और दया ने योनिया से नीचसे-नीच कर्म कराये और दारुण दुःख झेलवाया। अन्त में उसकी मृत्यु हो गयी और उसकी जन्मभूमि में अभी तक उसकी कबर मौजूद है। उसका मरना आवश्यक था, जिसमें वह भोगविलास के पश्चात मृत्यु की पीड़ा का अनुभव करे और लगाये हुए वृक्ष के कडुए फल चखे। लेकिन हेलेन के शरीर को त्याग करने के बाद उसने फिर स्त्री का जन्म लिया और फिर