तूने कुवासनाओं का दृश्य देखा और तुझे विदित हो गया कि यह कितनी घृणोत्पादक वस्तु है ? थायस, थामस, इन कुमागीर दार्शनिकों की भरष्टाताओं को याद कर और तब सोच कि तू भी उन्हीं के साथ अपने को भरष्ट करेगी ? उन दोनों कुलटाओं के कटाक्षों को, हावभाव को, घृणित संकेतों को याद कर, वह कितनी निर्लज्जता से हंसती थीं, कितनी बेहयाई से लोगों को अपने पास बुलाती थीं और तब निर्णय कर कि तू भी उन्हीं के सदृश अपने जीवन का सर्वनाश करती रहेगी ? ये दार्शनिक पुरुष थे जो अपने को सभ्य कहते हैं,
तूने कुवासनाओं का दृश्य देखा और तुझे विदित हो गया कि यह कितनी घृणोत्पादक वस्तु है ? थायस, थामस, इन कुमागीर दार्शनिकों की भरष्टाताओं को याद कर और तब सोच कि तू भी उन्हीं के साथ अपने को भरष्ट करेगी ? उन दोनों कुलटाओं के कटाक्षों को, हावभाव को, घृणित संकेतों को याद कर, वह कितनी निर्लज्जता से हंसती थीं, कितनी बेहयाई से लोगों को अपने पास बुलाती थीं और तब निर्णय कर कि तू भी उन्हीं के सदृश अपने जीवन का सर्वनाश करती रहेगी ? ये दार्शनिक पुरुष थे जो अपने को सभ्य कहते हैं,