जो अपने देहसमर्पण का मूल्य एक प्याले शराब से अधिक नहीं समझतीं। मैं यह सब जानते और देखते हुए भी इसी अन्धकार में पड़ी हुई हूं। मेरे जीवन को धिक्कार है।
उसने पापनाशी को जवाब दिया-'पिरय पिता, मुझमें अब जरा भी दम नहीं है। मैं ऐसी अशक्त हो रही हूं मानो दम निकल रहा है। कहां विश्राम मिलेगा, कहां एक घड़ी शान्ति से लेटूं ? मेरा चेहरा जल रहा है, आंखों से आंचसी निकल रही है, सिर में चक्कर आ रहा है, और मेरे हाथ इतने थक गये हैं कि
जो अपने देहसमर्पण का मूल्य एक प्याले शराब से अधिक नहीं समझतीं। मैं यह सब जानते और देखते हुए भी इसी अन्धकार में पड़ी हुई हूं। मेरे जीवन को धिक्कार है।
उसने पापनाशी को जवाब दिया-'पिरय पिता, मुझमें अब जरा भी दम नहीं है। मैं ऐसी अशक्त हो रही हूं मानो दम निकल रहा है। कहां विश्राम मिलेगा, कहां एक घड़ी शान्ति से लेटूं ? मेरा चेहरा जल रहा है, आंखों से आंचसी निकल रही है, सिर में चक्कर आ रहा है, और मेरे हाथ इतने थक गये हैं कि