अलंकार - Alankar

इतना भीषण शब्द करके धंधक उठी, मानो कोई भयंकर वनपशु गरज उठा, और ज्वालाजिह्वा जो सूर्य के परकाश में बहुत धुंधली दिखाई देती थी, किसी राक्षस की भांति अपने शिकार को निगलने लगी। ज्वाला ने उत्तेजित होकर गुलामों को भी उत्तेजित किया। वे दौड़दौड़कर भीतर से चीजें बाहर लाने लगे। कोई मोटीमोटी कालीनें घसीटे चला आता था, कोई वस्त्र के गट्ठर लिये दौड़ा आता था। जिन नकाबों पर सुनहरा काम किया हुआ था, जिन परदों पर सुन्दर बेलबूटे बने हुए थे,


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इतना भीषण शब्द करके धंधक उठी, मानो कोई भयंकर वनपशु गरज उठा, और ज्वालाजिह्वा जो सूर्य के परकाश में बहुत धुंधली दिखाई देती थी, किसी राक्षस की भांति अपने शिकार को निगलने लगी। ज्वाला ने उत्तेजित होकर गुलामों को भी उत्तेजित किया। वे दौड़दौड़कर भीतर से चीजें बाहर लाने लगे। कोई मोटीमोटी कालीनें घसीटे चला आता था, कोई वस्त्र के गट्ठर लिये दौड़ा आता था। जिन नकाबों पर सुनहरा काम किया हुआ था, जिन परदों पर सुन्दर बेलबूटे बने हुए थे,


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