सभी आग में झोंक दिये गये। अग्नि मुंह पर नकाब नहीं डालना चाहती और न उसे परदों से परेम है। वह भीषण और नग्न रहना चाहती है। तब लकड़ी के सामानों की बारी आयी। भारी मेज, कुर्सियां, मोटेमोटे गद्दे, सोने की परियों से सुशोभित पलंग गुलामों से उठते ही न थे। तीन बलिष्ठ हब्शी परियों की मूर्तियां छाती से लगाये हुए लाये। इन मूर्तियों में एक इतनी सुन्दर थी कि लोग उससे स्त्री कासा परेम करते थे। ऐसा जान पड़ता था कि तीन जंगली बन्दर तीन स्त्रियों
सभी आग में झोंक दिये गये। अग्नि मुंह पर नकाब नहीं डालना चाहती और न उसे परदों से परेम है। वह भीषण और नग्न रहना चाहती है। तब लकड़ी के सामानों की बारी आयी। भारी मेज, कुर्सियां, मोटेमोटे गद्दे, सोने की परियों से सुशोभित पलंग गुलामों से उठते ही न थे। तीन बलिष्ठ हब्शी परियों की मूर्तियां छाती से लगाये हुए लाये। इन मूर्तियों में एक इतनी सुन्दर थी कि लोग उससे स्त्री कासा परेम करते थे। ऐसा जान पड़ता था कि तीन जंगली बन्दर तीन स्त्रियों