से अपनी समस्त सम्पत्ति जलाकर किसी आश्रम में परविष्ट होने आ रही है।
दुकानदानों ने विचार किया-थायस यह नगर छोड़कर चली जा रही है। अब हम किसके हाथ अपनी चीजें बेचेंगे ? कौन हमें मुंहमांगे दाम देगा। यह बड़ा घोर अनर्थ है। थायस पागल हो गयी है क्या ? इस योगी ने अवश्य उस पर कोई मन्त्र डाल दिया है, नहीं तो इतना सुखविलास छोड़कर तपस्विनी बन जाना सहज नहीं है। उसके बिना हमारा निवार्ह क्योंकर होगा! वह हमारा सर्वनाश किये डालती है। योगी
से अपनी समस्त सम्पत्ति जलाकर किसी आश्रम में परविष्ट होने आ रही है।
दुकानदानों ने विचार किया-थायस यह नगर छोड़कर चली जा रही है। अब हम किसके हाथ अपनी चीजें बेचेंगे ? कौन हमें मुंहमांगे दाम देगा। यह बड़ा घोर अनर्थ है। थायस पागल हो गयी है क्या ? इस योगी ने अवश्य उस पर कोई मन्त्र डाल दिया है, नहीं तो इतना सुखविलास छोड़कर तपस्विनी बन जाना सहज नहीं है। उसके बिना हमारा निवार्ह क्योंकर होगा! वह हमारा सर्वनाश किये डालती है। योगी