से शाहजी थे तो मुकाबले में दूसरी तरफ उनके श्वसुर यादवराव लड़ रहे थे जिसका फल यह हुआ कि थोड़े ही समय में शिवाजी के पिता और माता में मन®मालिन्य बढ़ गया। फल स्वरूप सन् 1630 ई. में शाहजी ने दूसरी शादी कर ली जिससे जीजीबाई मुसलमानों के कब्जे में फंस गई। वह अपने पिता के एक सम्बन्धी के साथ थी। शिवाजी पर कोई आपत्ति न आ सकती थी क्योंकि इस उसने अलग छिपा रखा था।
छः वर्ष का बालक मुसलमान आक्रमणकारियों के हाथ से बचता और भागता फिरता है।
से शाहजी थे तो मुकाबले में दूसरी तरफ उनके श्वसुर यादवराव लड़ रहे थे जिसका फल यह हुआ कि थोड़े ही समय में शिवाजी के पिता और माता में मन®मालिन्य बढ़ गया। फल स्वरूप सन् 1630 ई. में शाहजी ने दूसरी शादी कर ली जिससे जीजीबाई मुसलमानों के कब्जे में फंस गई। वह अपने पिता के एक सम्बन्धी के साथ थी। शिवाजी पर कोई आपत्ति न आ सकती थी क्योंकि इस उसने अलग छिपा रखा था।
छः वर्ष का बालक मुसलमान आक्रमणकारियों के हाथ से बचता और भागता फिरता है।